Urea Price Increase 2026: देशभर के किसानों के लिए यूरिया की कीमतों में किए गया बदलाव एक बड़ी चिंता विषय बनता जा रहा है। कई जगहों से किसान संगठनों द्वारा इसके विरोध की खबरे भी सामने आने लगी है। पिछले कुछ सालों से यूरिया के बैग के वजन लगातार कटौती की जा रही है, जबकि प्रति किलो दर में बढ़ोतरी हो रही है । यह बदलाव भले धीरे-धीरे हुआ हो, लेकिन देश की रीढ़ की हड्डी के जाने वाले किसानों पर इसका इसका सीधा असर पड़ा है, खेती की लागत पर लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों का आर्थिक बोझ का सामना करना पद रहा है । ऐसे में अब एक बार फिर किसानों को यूरिया खरीदने के लिए अब ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे।
केंद्र सरकार ने Urea के पैकेट का वजन 45 किलो से घटाकर 40 किलो कर दिया है। Ministry of Chemicals and Fertilizers ने इसके लिए बकायदा Gazette Notification जारी कर दी है। सरकार इसे मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी कदम बता रही है, लेकिन किसान इसे नई मुसीबत मान रहे हैं। यूरिया के अनियमित उपयोग पर लगाम लगाने के नाम पर सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले से किसानों को खेती के लिए प्रति एकड़ लागत बढ़ जाएगी।
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यूरिया के बैग का वजन घटा जबकि कीमत बढ़ी
40 किलो के नए पैकेट में 37% नाइट्रोजन और 17% सल्फर मिलाया जाएगा। नए 40 किलो पैकेट का दाम 254 रुपये तय किया गया है, जबकि पुराने 45 किलो पैकेट का भाव 266 रुपये 50 पैसे ही रहेगा। हिसाब लगाएं तो अब किसानों को प्रति किलो यूरिया ज्यादा देना पड़ेगा।
| पैकेट | वजन | कीमत (₹) | प्रति किलो दर (₹) |
|---|---|---|---|
| पुराना भाव | 45 किलो | 266.50 | 5.92 |
| नया भाव | 40 किलो | 254.00 | 6.35 |
वर्ष 2018 के मार्च तक यूरिया बैग 50 किलो का हुआ करता था। तब इसे 45 किलो किया गया और अब 40 किलो कर दिया गया। राज्य में यूरिया की खपत प्रतिवर्ष करीब 65 लाख मीट्रिक टन है, जो विशेषज्ञों के मुताबिक अधिकतम उपयोग की स्थिति है।
दुष्प्रयोग रोकने का दावा
जानकारों का कहना है कि अनियंत्रित यूरिया प्रयोग को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। किसान फसलों में जरूरत से कई गुना ज्यादा यूरिया डाल रहे हैं। इसके अलावा प्लाईवुड इंडस्ट्री, प्रिंटिंग इंडस्ट्री, मिलावटी दूध और अन्य रसायन में भी अल्कोहल का प्रयोग होता है, जिसे रोकने के लिए सल्फर मिक्सिंग और वजन कम किया जाता है।
सल्फर मिलाने का क्या फायदा?
17 प्रतिशत सल्फर मिलाने से मिट्टी में सल्फर की कमी दूर होगी। फसलों की Health बेहतर होगी और फसलें हरी-भरी रहेंगी। लेकिन किसानों का सवाल है कि जब मात्रा ही कम होगी तो गुणवत्ता से क्या होगा?
नीम कोटेड यूरिया का पुराना प्रयोग
यूरिया का दुरुपयोग रोकने के लिए करीब पिछले एक दशक पहले Neem Coated Urea लाई गई थी। यह यूरिया खेतों में धीरे घुलता है और भूजल प्रदूषण कम होता है। वायु प्रदूषण का असर बहुत कम हुआ है । मृदा पोषक तत्वों की उपयोगिता क्षमता बेहतर और 10-15 प्रतिशत खपत कम हुई। कीट नियंत्रण में भी मदद मिली। अब सरकार ने सल्फर फोर्टिफाइड यूरिया को हटा दिया है।
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अक्सर पूछे जाने वाले किसानों के सवाल (FAQs)
अब 40 किलो का पैकेट मिलेगा, पहले 45 किलो का था।
40 किलो पैकेट 254 रुपये का मिलेगा, जबकि 45 किलो पैकेट 266.50 रुपये का ही रहेगा।
17% Sulfur से Soil Health बेहतर होगी और Crop Yield बढ़ेगी।
प्रति किलो दर बढ़ने से किसानों की खेती की लागत बढ़ जाएगी क्योंकि उन्हें अब ज्यादा पैकेट खरीदने पड़ेंगे।
अनियमित उपयोग और पर्यावरण प्रदूषण पर रोक के लिए, साथ ही गैर-कृषि उपयोग पर लगाम लगाएं।
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