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किसानों को राहत! राजस्थान में फसल बीमा में 6 बड़े बदलाव के साथ डेडलाइन 16 अगस्त तक बढ़ी, पढ़े पूरी जानकारी

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Deadline for Kharif crop insurance scheme in Rajasthan extended to August 16, with 6 major changes.
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फसल बीमा योजना खरीफ 2026, 6 बड़े बदलाव के साथ फसल बीमा की तारीख बढ़ी

Kharif 2026 Crop Insurance Scheme: आपने अगर अब तक अपनी खरीफ फसल का बीमा नहीं कराया, तो घबराने की जरूरत नहीं। राजस्थान सरकार ने आखिरी तारीख आगे खिसका दी है। पहले यह डेडलाइन 31 जुलाई थी। अब किसान 16 अगस्त 2026 तक अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं।

यह फैसला उन हजारों किसानों के लिए राहत लेकर आया है। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने इसकी पुष्टि की है। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सिर्फ एक स्कीम नहीं, बल्कि किसानों की आय को सुरक्षित रखने का जरिया है। सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, चक्रवात इन सबसे होने वाले नुकसान की भरपाई इसी योजना से होती है।

किन किसानों को मिलेगा फायदा

ऋणी किसान, गैर-ऋणी किसान और बटाईदार – तीनों इस योजना का लाभ ले सकते हैं। शर्त बस इतनी है कि गैर-ऋणी किसानों के पास एग्रीस्टैक आईडी (Agri Stack ID) होनी चाहिए। बिना इसके आवेदन आगे नहीं बढ़ेगा।

इसे भी पढ़े – एग्रीस्टैक आईडी कैसे बनाएं — जाने पूरी प्रक्रिया

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2026-27 सीज़न के लिए राज्य सरकार ने चार बीमा कंपनियों को चुना है। ये कंपनियां अलग-अलग जिलों में किसानों को बीमा सुविधा देंगी। बीमा कराने के कई रास्ते हैं – राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल, नजदीकी बैंक, सहकारी समिति या फिर कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)।

जान लें- फसल बीमा करवाने की महत्वपूर्ण तारीखें

  • 9 अगस्त 2026 — योजना से बाहर होने के लिए घोषणा-पत्र देने की आखिरी तारीख
  • 14 अगस्त 2026 — बीमित फसल के नाम में संशोधन की आखिरी तारीख
  • 16 अगस्त 2026 — बीमा कराने की अंतिम तारीख

किसानों को कितना देना होगा प्रीमियम ?

प्रीमियम की रकम फसल के हिसाब से बदलती है। खरीफ की खाद्यान्न, दलहन और तिलहन फसलों पर किसान को सिर्फ 2% प्रीमियम भरना होगा। रबी की इन्हीं फसलों पर यह दर 1.5% रहेगी।

वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए प्रीमियम थोड़ा ज्यादा है, 5%। बाकी की पूरी रकम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करती है। मतलब किसान की जेब पर बोझ बहुत कम, कवरेज पूरा।

बीमा योजना में 6 बड़े बदलाव हुए, किसानों को मिलेगा फायदा

इस बार योजना में कई अहम बदलाव किए गए हैं। इनमें से कुछ बदलाव सीधे किसानों की जेब से जुड़े हैं।

पहला – 60:130 मॉडल लागू

बीमा कंपनियों और सरकार के बीच अब जोखिम साझा करने के लिए 60:130 मॉडल अपनाया गया है। इससे कंपनियों के मुनाफे पर लगाम रहेगी। अगर नुकसान 130% से ज्यादा होता है, तो सरकार भी भरपाई में हिस्सा लेगी।

दूसरा – बुवाई न हो पाने पर तुरंत राहत

कम बारिश या खराब मौसम के चलते अगर किसान 75% या उससे ज्यादा क्षेत्र में बुवाई नहीं कर पाते, तो बीमित राशि का 25% हिस्सा तुरंत मिलेगा। इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

तीसरा – तकनीक से पारदर्शिता

उपज आंकलन के लिए अब विंड पोर्टल और क्रॉपिक तकनीक का इस्तेमाल होगा। मौसम डेटा और रियल-टाइम फोटो से सर्वे में गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी। दावों का निपटान भी पहले से तेज होगा।

चौथा – देर से भुगतान पर ब्याज

अगर बीमा कंपनी समय पर क्लेम नहीं देती, तो उसे 12% सालाना ब्याज चुकाना होगा। यह नियम कंपनियों पर दबाव बनाने के लिए लाया गया है।

पाँचवां – को-विटनेस अनिवार्य

फसल कटाई प्रयोगों में अब बीमा कंपनी का कॉ-विटनेस करना जरूरी है। नहीं किया तो बाद में कंपनी की कोई आपत्ति मान्य नहीं होगी।

छठवाँ – शिकायत के लिए अलग सिस्टम

जिला और तहसील स्तर पर शिकायत निराकरण समितियां बनाई गई हैं। इनकी हर महीने बैठक अनिवार्य रहेगी, ताकि किसानों की समस्याएं लटकी न रहें।

सामान्य उपज जोखिम स्तर 80% तय किया गया है। इससे कम उपज होने पर किसान को आनुपातिक क्लेम मिलेगा।

किन फसलों की बीमित राशि सबसे ज्यादा बढ़ी

खरीफ फसलों की बीमित राशि (प्रति हेक्टेयर) में इस बार अच्छा-खासा उछाल देखने को मिला है।

फसल20252026बढ़ोतरी
बाजरा₹8,952₹21,068135.34%
ग्वार₹14,251₹23,80467.03%
ज्वार₹7,526₹7,526कोई बदलाव नहीं
मोठ₹17,582₹31,72480.43%
तिल₹16,610₹16,610कोई बदलाव नहीं
मूंग₹18,917₹32,14369.92%
मूंगफली₹1,18,091₹1,56,24132.31%

बाजरा किसानों के लिए यह खबर सबसे बड़ी राहत है। बीमित राशि करीब सवा सौ फीसदी बढ़ी है। पिछले सालों में क्लेम और लागत के आंकड़ों के आधार पर यह संशोधन किया गया।

रबी फसलों को भी मिला फायदा

रबी सीज़न की बीमित राशि में भी बढ़ोतरी हुई है।

  • जीरा — ₹69,639 से बढ़कर ₹85,973
  • ईसबगोल — ₹55,882 से बढ़कर ₹58,180
  • सरसों — ₹70,231 से बढ़कर ₹70,575
  • गेहूं — ₹32,942 से बढ़कर ₹49,256

गेहूं की बीमित राशि में करीब 15 हजार रुपए का इजाफा हुआ है। यह उन किसानों के लिए अच्छी खबर है जो हर साल रबी सीज़न में गेहूं की बुवाई करते हैं।

आगे क्या करें

अगर आपने अभी तक प्रधानमंत्री फसल बीमा के अंतर्गत अपनी फ़सल का बीमा नहीं कराया, तो 16 अगस्त की तारीख को आखिरी मौका मानकर न चलें। कृषि आयुक्त ने खुद अपील की है कि किसान अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते बीमा करा लें।

नजदीकी बैंक शाखा या CSC सेंटर पर जाकर एक बार दस्तावेज जरूर चेक करा लें, खासकर अगर आप गैर-ऋणी किसान हैं और एग्रीस्टैक आईडी अभी तक नहीं बनवाई। आने वाले दिनों में बीमा कंपनियों की जिलेवार सूची और पोर्टल पर लोड बढ़ने की आशंका है, इसलिए देर करना घाटे का सौदा हो सकता है।

Official Sources

योजना से संबंधित महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाब (FAQs):

खरीफ फसल बीमा कराने की नई आखिरी तारीख क्या है?

अब किसान 16 अगस्त 2026 तक अपनी खरीफ फसलों का बीमा करा सकते हैं।

फसल बीमा के लिए एग्रीस्टैक आईडी किसे बनवानी जरूरी है?

जो किसान बैंक से कर्ज नहीं लेते यानी गैर-ऋणी किसान हैं, उनके लिए एग्रीस्टैक आईडी अनिवार्य है।

अगर किसान फसल बीमा से बाहर होना चाहता है तो क्या करना होगा?

9 अगस्त 2026 तक संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था में घोषणा-पत्र जमा करना होगा।

फसल के नाम में गलती हो गई है तो सुधार कैसे होगा?

14 अगस्त 2026 तक बीमित फसल के नाम में संशोधन कराया जा सकता है।

अगर बीमा कंपनी समय पर क्लेम नहीं देती तो क्या होगा?

कंपनी को देय क्लेम राशि पर 12% सालाना ब्याज किसान को चुकाना होगा।

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