Births and Deaths Amendment Bill 2026: लोकसभा ने शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को बिना किसी बहस के पास कर दिया। यह बिल 29 जुलाई को सदन में पेश हुआ था। इसका सीधा मकसद है देरी से होने वाले रजिस्ट्रेशन पर नकेल कसना, ताकि लोग जन्म और मृत्यु की रिपोर्टिंग समय पर करें।
यह बिल जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13 में बदलाव करता है। मंत्रालय की तरफ से इसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पेश किया।
आपके घर में किसी बच्चे का जन्म हुआ और सर्टिफिकेट बनवाना अभी तक टल गया? या परिवार में किसी की मौत के बाद डेथ सर्टिफिकेट की फाइल अलमारी में दबी पड़ी है? अब देरी करना पहले से कहीं ज्यादा झंझट भरा हो सकता है।
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दो साल की देरी पर अब कौन देगा ऑर्डर
नए कानून में देरी के मामलों को दो हिस्सों में बांटा गया है। अगर जन्म या मृत्यु की जानकारी घटना के एक साल बाद लेकिन दो साल के अंदर दी जाती है, तो रजिस्ट्रेशन के लिए डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट या डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट का आदेश चाहिए होगा। सत्यता की जांच और तय फीस जमा करने के बाद ही यह आदेश जारी होगा।
दो साल के बाद की देरी वाले मामलों में मामला पूरी तरह बदल जाता है। ऐसे केस में अब सिर्फ प्रथम श्रेणी के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट का आदेश ही काम करेगा। न कोई डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, न सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट।
पुराना नियम क्या कहता था, नया क्या बदला
मौजूदा जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में अभी तक सिर्फ एक साल की समय-सीमा तय थी। घटना के एक साल बाद दी गई किसी भी जानकारी के लिए डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट या अधिकृत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट का आदेश काफी होता था, चाहे देरी दो साल की हो या दस साल की।
नया बिल इस एक ही स्लैब को दो हिस्सों में तोड़ता है। एक से दो साल की देरी में पुरानी व्यवस्था ही चलेगी। दो साल के बाद अब न्यायिक प्रक्रिया सख्त होगी और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा।
एक तकनीकी बदलाव भी हुआ है। कानून में “एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट” की परिभाषा अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अनुसार होगी। पुराने कानून, यानी 1973 के कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर, के हवाले को हटा दिया गया है। यह बदलाव इसलिए जरूरी था क्योंकि देश में आपराधिक प्रक्रिया संहिता की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू हो चुकी है।
सरकार ने ये बदलाव क्यों किए
बिल के साथ पेश किए गए ऑब्जेक्ट्स एंड रीज़न्स स्टेटमेंट में सरकार ने साफ कहा है कि मकसद है देरी से होने वाले पंजीकरण के नियमों को और सख्त बनाना, ताकि लोग समय पर जन्म-मृत्यु की सूचना दें।
वजह समझना मुश्किल नहीं। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र अब सिर्फ कागज़ का टुकड़ा नहीं रहे। स्कूल एडमिशन से लेकर पासपोर्ट, सरकारी योजनाओं का फायदा, संपत्ति का बंटवारा और कानूनी विवादों तक – हर जगह इनकी जरूरत पड़ती है। जब कोई सर्टिफिकेट सालों बाद बनवाया जाता है, तो जन्मतिथि (Date of Birth ) जैसी जानकारी में हेरफेर की गुंजाइश बढ़ जाती है।
इसी वजह से सरकार का जोर फर्जी दस्तावेजों पर लगाम कसने पर है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के स्तर की जांच का मतलब है ज्यादा सख्त सत्यापन प्रक्रिया।
कैबिनेट की मंजूरी से लेकर लोकसभा पास तक
टाइमलाइन देखें तो पूरा मामला बहुत तेजी से आगे बढ़ा।
- 20 जुलाई 2026: केंद्रीय कैबिनेट ने बिल को मंजूरी दी
- 24 जुलाई 2026: बिल पर गृह मंत्री अमित शाह के हस्ताक्षर
- 29 जुलाई 2026: लोकसभा में बिल पेश
- 31 जुलाई 2026: लोकसभा से बिना बहस पास
बिल अब राज्यसभा की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। दोनों सदनों से पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद भी यह तुरंत लागू नहीं होगा। कानून खुद कहता है कि यह उसी तारीख से लागू होगा जो केंद्र सरकार आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के जरिए तय करेगी। मतलब लागू होने की सही तारीख अभी साफ नहीं है।
आप पर क्या पड़ेगा असर
अगर घर में हाल में किस बच्चे का जन्म या किसी की मृत्यु हुई है, तो सबसे सीधी सलाह यही है की सर्टिफिकेट बनवाने में देरी न करें। एक साल के अंदर रजिस्ट्रेशन करा लेने पर मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत ही नहीं पड़ती।
जिन लोगों का मामला पहले से एक साल से ज्यादा पुराना है, उनके लिए अभी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट या सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट स्तर पर ही राहत मिल सकती है, बशर्ते देरी दो साल के अंदर की हो। दो साल पार कर चुके मामलों में नया कानून लागू होने के बाद कोर्ट जैसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, जिसमें समय ज्यादा लग सकता है।
बिल के फाइनेंशियल मेमोरेंडम में यह भी साफ किया गया है कि इस कानून से सरकार पर कोई नया खर्च नहीं आएगा। नियम बनाने का अधिकार राज्य सरकारों के पास पहले से मौजूद अधिनियम की धारा 30 के तहत बना रहेगा।
क्या जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 का लागू होगा?
अभी राज्यसभा की मंजूरी बाकी है। उसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और फिर गजट नोटिफिकेशन – तभी तय होगा कि नया नियम असल में किस तारीख से लोगों पर लागू होता है। तब तक जिन परिवारों को सर्टिफिकेट बनवाना है, उनके लिए फिलहाल पुराना नियम ही चल रहा है। सबसे बेहतर यही रहेगा कि देरी किए बिना जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन करा लिया जाए।
जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन बिल 2026 से संबंधित सवाल-जवाब (FAQs)
यह जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में बदलाव करने वाला बिल है, जो देरी से होने वाले रजिस्ट्रेशन के नियमों को सख्त बनाता है। इसे लोकसभा ने 31 जुलाई 2026 को पास किया।
अभी सही तारीख तय नहीं है। बिल राज्यसभा से पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार गजट नोटिफिकेशन के जरिए तारीख तय करेगी।
नया कानून लागू होने के बाद दो साल से ज्यादा देरी वाले मामलों में सिर्फ प्रथम श्रेणी के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट का आदेश ही मान्य होगा।
पुराने नियम में एक साल बाद की हर देरी के लिए डिस्ट्रिक्ट/सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट का आदेश काफी था। नए नियम में एक-दो साल के लिए यही व्यवस्था रहेगी, लेकिन दो साल के बाद ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा।
अभी नहीं। लोकसभा से पास होने के बाद यह राज्यसभा की मंजूरी का इंतजार कर रहा है, उसके बाद राष्ट्रपति की सहमति और गजट नोटिफिकेशन जरूरी होगा।
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