आखिर क्या है हरियाणा में किसानों की मांगें? क्यों हो रहा है 3 कृषि अध्यादेशों का विरोध! जानिए

हरियाणा में किसानों पर हुआ लाठीचार्ज: भारतीय किसान संघ और अन्य किसान संगठनों ने ‘किसान बचाओ, मंडी बचाओ’ रैली का आयोजन किया जिसमें किसानों द्वारा केंद्र सरकार के तीन अध्यादेशों का विरोध किया जा रहा हैं, ये है वो केंद्र सरकार के 3 कृषि अध्यादेश (Agricultural Ordinance) जिनका हो रहा है विरोध.

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haryana kisan andolan
Haryana Kisan Andolan

Haryana Kisan Andolan 2020 : हरियाणा में कुरुक्षेत्र के पीपली मंडी में केंद्र सरकार के 3 कृषि अध्यादेशों (Agriculture Ordinance) के विरोध में रैली निकाल रहे किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। बुधवार 10 सितम्बर 2020 को भारतीय किसान संघ और अन्य किसान संगठनों ने ‘किसान बचाओ, मंडी बचाओ’ रैली बुलाई थी। इस किसान रैली (Farmers Rally) में आये हज़ारों की तादात में किसान सड़कों पर उतर आये थे और पिपली में राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया। जिसके बाद पुलिस द्वारा किसानों की इस भीड़ को नियंत्रित करने वहां से हटाने के लिए उन पर बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया गया जिसे काफी किसानों को चोटें आई। हरियाणा सरकार द्वारा देश के अन्नदाता पर चलाई गयी लाठी के बाद पुरे देश में इसकी आलोचना हो रही है , और हरियाणा की खट्टर सरकार बैकफुट पर आ गई है।

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क्या है हरियाणा में किसानों की मांगें ?

ये है हरियाणा में किसानों की मांगें जिनके लिए हो रहा है आन्दोलन

हरियाणा में भारतीय किसान संघ और अन्य किसान संगठनों ने ‘किसान बचाओ, मंडी बचाओ’ रैली का आयोजन किया जिसमें किसानों द्वारा केंद्र सरकार के तीन अध्यादेशों का विरोध किया जा रहा हैं, ये है वो केंद्र सरकार के 3 कृषि अध्यादेश (Agricultural Ordinance)..

  1. एसेंशियल एक्ट 1955 में बदलाव
  2. कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग / अनुबंध खेती
  3. कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020
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Essential Commodities Act 1955

पहले फसल व्यापारियों द्वारा किसानों की फसलों को कम कीमतों में खरीद कर उनका भंडारण कर कालाबाजारी की जाती थी, जिसे रोकने के लिए Essential Commodities Act 1955 को लागू किया गया था . इस एक्ट में व्यापारियों के लिए भंडारण की एक लिमिट तय कर दी गई थी और व्यापारी उस लिमिट से अधिक किसी भी फसल का भंडारण नही कर सकता था .

केंद्र सरकार के नये अध्यादेश के तहत अब दाल, आलू, प्याज, अनाज, इडेबल ऑयल इत्यादि उत्पादों को आवश्यक वस्तु के नियम से बाहर कर इसकी स्टॉक सीमा (लिमिट) खत्म कर दी है। सरकार के इस फैसले से किसानों का मानना है की यह नया अध्यादेश किसानों के हित में नही है इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा और देश की बड़ी-बड़ी कम्पनिया और सुपर मार्केट स्टोर अपने गोदामों में इन कृषि उत्पादों का भंडारण कर लेंगे जिसे वो बाद में ऊंचे दामों पर ग्राहकों को बेचेंगे।

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग / अनुबंध खेती

अनुबंध खेती : इसके तहत किसान अपनी खेती भूमि का अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) किसी कंपनी या व्यक्ति के साथ कर सकेगा। जिसके बाद किसान द्वारा उगाई गई फसलों की पैदावार और दाम पहले ही तय कर लिया जाएगा ,तथा फसल उत्पादन का सारा खर्च जैसे : खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी इत्यादि का खर्च भी कॉन्ट्रैक्टर ही उठाएगा। किसानों को बाजार की अपेक्षा अधिक भाव (कीमत) मिल सकेंगे । इससे कृषि फसलों के मूल्यों (भावों) में होने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम से किसान मुक्तरह सकेगा है।

केंद्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग / अनुबंध खेती को बढ़ावा देने की भी नीति पर काम शुरू किया गया है, जिससे किसान नाराज हैं। भारतीय किसान महासंघ का मानना है की इस नये अध्यादेश के चलते किसान अपनी ही कृषि भूमि पर एक तरीके से बंधवा मजदूर बनकर रहा जाएगा । महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ का कहना है की , “इस नए अध्यादेश के तहत किसान अपनी ही जमीन पर मजदूर बन के रह जायेगा। इस अध्यादेश के जरिये केंद्र सरकार कृषि का पश्चिमी मॉडल हमारे किसानों पर थोपना चाहती है लेकिन सरकार यह बात भूल जाती है कि हमारे किसानों की तुलना विदेशी किसानों से नहीं हो सकती क्योंकि हमारे यहां भूमि-जनसंख्या अनुपात पश्चिमी देशों से अलग है और हमारे यहां खेती-किसानी जीवनयापन करने का साधन है वहीं पश्चिमी देशों में यह व्यवसाय है।”

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कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020

कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020 (Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Ordinance) को 5 जून, 2020 को जारी किया गया। इस नये अध्यादेश राज्यों के कृषि उत्पाद मार्केट कानूनों (राज्य एपीएमसी एक्ट्स) के अंतर्गत अधिसूचित बाजारों के बाहर किसानों की उपज के निर्बाध (फ्री) व्यापार का प्रावधान करता है।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन का कहना है की , “सरकार के इस फैसले से मंडी व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जायेगी। इससे किसानों को नुकसान होगा और व्यापरी वर्ग और बिचौलियों को लाभ मिलेगा ।” इस अध्यादेश के तहत वन नेशन, वन मार्केट की बात कही जा रही है, लेकिन सरकार की मंशा इसके जरिये कृषि उपज विपणन समितियों (Agricultural produce market committee-APMC) के एकाधिकार को समाप्त करने की है। भारतीय किसान महासंघ का मानना है की अगर इस अध्यादेश को वापस लिया जाता है तो व्यापारियों की मनमानी बढ़ेगी, किसानों को उसकी फसल पैदावार की सही कीमत नहीं मिलेगी।”

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